भारतीय वित्तीय संस्थान
भारत के वित्तीय संस्थाओं को मुख्य रूप से तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
- बैंकिंग संस्थाएं(Banking institutions)
- गैर बैंकिंग संस्था कंपनी(Non Banking inatitution company)
- सूक्ष्म वित्त कंपनी(micro finance company)
बैंकिंग संस्थाएं
वह सभी संस्थाएं जो बैंकिंग अधिनियम 1949 के अनुसूची दो में शामिल हैं उन्हें बैंक कहा जाता है इन सभी को भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा निर्देशित नियंत्रित एवं नियमित किया जाता है।
इनके प्रमुख कार्य निम्न है-
- लोगों के पैसे जमा लेना
- उधार या ऋण देना
- बैंकिंग सुविधाएं जैसे डेबिट कार्ड ,क्रेडिट कार्ड ,एटीएम एवं नेट बैंकिंग उपलब्ध कराना।
- मांग पत्र डिमांड ड्राफ्ट या चेक जारी करना।
- एजेंट के रूप में कार्य करना जिससे ग्राहक पूंजी बाजार में निवेश कर सकें ।
- अन्य कार्यों में लॉकर सुविधा उपलब्ध कराना।
गैर बैंकिंग संस्था कंपनियां
गैर बैंकिंग संस्था कंपनियां कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत होते हैं। यह पूरी तरह से बैंक नहीं होते किंतु बैंक से जुड़े कुछ प्रमुख कार्य इनके द्वारा किया जाता है जैसे ग्राहक से पैसे जमा करना और ऋण या उधार देना , बीमा संबंधी कार्य, शेयर मार्केट में निवेश करना।
यदि कोई कंपनी ग्राहक से पैसे जमा करना और उधार देने का काम करता है तो वह आरबीआई के द्वारा नियंत्रित और विनियमित किया जाता है।
कोई बीमा संबंधी कार्य कर रहा है तो वह आईआरडीए एवं पूंजी बाजार से संबंधित कार्य सेबी के द्वारा विनियमित एवं नियंत्रित किया जाता है।
इनकी प्रमुख विशेषताएं-
- यह कंपनियां ग्राहक से एक निश्चित अवधि के लिए पैसे जमा लेते हैं उससे पहले इन पैसों को नहीं निकाला जा सकता।
- इनके द्वारा कोई मांग पत्र जारी नहीं किया जाता।
- भुगतान के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती जैसे डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग एवं एटीएम।
- लॉकर की सुविधा नहीं होती
एलआईसी, सहारा इंडिया परिवार, मुचल फंड कंपनियां इसी प्रकार की कंपनियां होती हैं।
सूक्ष्म वित्तीय कंपनियां
यह भी कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत होते हैं जो बिना किसी गारंटी की उधार देती हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी जरूरतों को पूरा करते हैं।

