भारत में गरीबी
गरीबी का अर्थ - सामान्य अर्थों में गरीबी वह स्थिति है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है उसे गरीब कहा जाता है। मूलभूत आवश्यकता का मतलब भोजन एवं वस्त्र से हैं।
व्यापक अर्थों में गरीबी का मतलब ना केवल भोजन एवं वस्त्र से है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य ,महिलाओं को काम जैसे चीजों को भी इसके अंतर्गत शामिल किया जाता है।
दुनिया के देशों में गरीबी निर्धारण का मापदंड अलग-अलग है गरीबी निर्धारण के मापदंड के अनुसार गरीबी को निम्न प्रकार में बांटा जा सकता है-
- सापेक्ष गरीबी
- निरपेक्ष गरीबी
सापेक्ष गरीबी
सापेक्ष गरीबी विकसित देशों में पाई जाती है जिसमें किसी व्यक्ति की आय औसत आय से कम होती है। इसमें हम प्रति व्यक्ति आय या संपत्ति की तुलना की जाती है।
लॉरेंज वक्र
लोरेंज ने सापेक्ष गरीबी को ग्राफ की मदद से समझाया जिसे लोरेंज वक्र कहा जाता है, यह ग्राफ आय की विषमता को प्रदर्शित करता है ।लोरेंज ने एक अक्ष में जनसंख्या एवं दूसरे अक्ष में आय को लेकर ग्राफ खींचा । यदि यदि किसी देश में सभी लोगों की आय बराबर हो तो हमें 45 अंश का कोण बनाते हुए एक सीधी रेखा का ग्राफ मिलती है ,जो यह बतलाती है कि आय की विषमता शून्य है । इसे ग्राफ का आदर्श स्थिति कहा जाता है।
लेकिन यदि सभी लोगों की आय बराबर ना हो तो यह ग्राफ वक्राकार मिलता है ,जितनी अधिक आय में विषमता होगी यह उतने ही वक्राकार होते जाएगी।
गिनी गुणांक
गिनी ने लोरेंज के द्वारा प्रदर्शित ग्राफ के आधार पर एक सूत्र दिया जिसे गिनी गुणांक कहा जाता है।
गिनी गुणांक = आदर्श स्थिति से वक्र का क्षेत्रफल /आदर्श स्थिति से कुल क्षेत्रफल
👉यदि गिनी गुणांक का मान 1 प्राप्त होता है ,तो आय की विषमता सबसे अधिकतम होगी।
👉 यदि गिनी गुणांक का मान्य शून्य होता है ,तो आय की विषमता शून्य होगी अर्थात सबकी आय एक बराबर होगी ।
👉 यदि गिनी गुणांक का मान बढ़ते जाता है तो आय की विषमता भी बढ़ती जाती है।
विश्व बैंक के अनुसार जिसकी आय 1.25 डॉलर से कम है ,उसे गरीब की श्रेणी में रखा गया है।
निरपेक्ष गरीबी
विकासशील देशों में इस प्रकार की गरीबी देखी जाती है, जिसमें मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की असमर्थता के आधार पर गरीबी का मापन किया जाता है।
भारत में गरीबी निर्धारण के मापदंड
भारत में गरीब कौन है इसकी पहचान करने के लिए मापदंड बनाया गया जो नीचे उल्लेखित किया गया है-
कैलोरी मापन- प्रतिदिन एक व्यक्ति को कितनी कैलोरी ऊर्जा की आवश्यकता है।
न्यूनतम उपभोग व्यय - एक व्यक्ति को प्रतिदिन मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में कितना खर्च आता है।
इन दोनों मापदंड के आधार पर गरीबी के आकलन हेतु कई समितियां बनाई गई जो निम्न है-
- नीलकांत दांडेकर और वीएम रथ - यह समिति 1971 में गठित की गई थी। इस समिति के अनुसार जो व्यक्ति प्रतिदिन 2250 कैलोरी भोजन प्राप्त करने में असमर्थ है उसे गरीब की श्रेणी में रखा गया था। गरीबी मापन के आंकड़े वर्ष 1960- 61 इसवी पर आधारित था।
- वाई के अलध समिति - किस समिति का गठन 1989 में किया गया था जिसके अध्यक्ष वाई के अलध थे । इनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के लिए 2400 कैलोरी एवं शहरी क्षेत्र के लिए 2100 कैलोरी से कम भोजन प्राप्त करने में असमर्थ है तो उसे गरीब की श्रेणी में रखा गया था आंकड़े का आधार वर्ष 1973 -74 था ।
- लकड़ावाला समिति -इस समिति का गठन 1989 में किया गया था जिसके अध्यक्ष प्रोफेसर डीटी लकड़वाला थे ।इस समिति ने प्रत्येक राज्य में ग्रामीण और शहरी निर्धनता के लिए अलग-अलग मूल्य सूचकांकों की बात की जो निम्न है-
ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता रेखा- ग्रामीण क्षेत्र में निर्धनता रेखा के निर्धारण हेतु कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार माना।
शहरी क्षेत्र में निर्धनता रेखा शहरी क्षेत्र में निर्धनता रेखा के निर्धारण हेतु औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार माना।
- सुरेश तेंदुलकर समिति -इसका गठन 2004 में किया गया था जिसने अपनी रिपोर्ट 2009 में सौपीं । तेंदुलकर समिति ने गरीबी को व्यापक रूप से परिभाषित किया। इन्होंने भोजन के अलावा छः बुनियादी आवश्यकताओं जैसे शिक्षा ,स्वास्थ्य ,बुनियादी संरचना स्वच्छ वातावरण तथा महिलाओं की काम तक पहुँच को भी गरीबी निर्धारण का आधार माना।
तेंदुलकर समिति के अनुसार वर्ष 2004- 05 के मूल्य पर ग्रामीण क्षेत्र के लिए 446.68 रू प्रतिमाह एवं शहरी क्षेत्र के लिए 578.80 रू प्रतिमाह गरीबी रेखा का निर्धारण किया ।
वर्ष 2011 -12 के मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र के लिए 816 रू एवं शहरी क्षेत्र के लिए 1000 रू निर्धारित किया गया ।
इस समिति के अनुसार संपूर्ण भारत में वर्ष 2004-05 के मूल्य के आधार पर भारत की कुल जनसंख्या का 37.2% जनसंख्या गरीब गरीब था। जिसमें से 41.8% ग्रामीण क्षेत्र में और शहरी क्षेत्र में 25.7% गरीबी थी ।
यह वर्ष 2011-12 में यह घटकर 25.7 % हो गई।
- सी रंगराजन समिति - इसका गठन 2012 में की गई थी और इस समिति ने 2014 में अपनी रिपोर्ट सौपीं । इस समिति ने गरीबी मापने हेतु कैलोरी मूल्य को आधार माना ।
इस समिति ने ग्रामीण क्षेत्र के लिए 972 रू एवं शहरी क्षेत्र के लिए 1407 रू मासिक प्रतिव्यक्ति उपभोग व्यय को गरीबी का आधार माना ।
इस समिति के अनुसार वर्ष 2011-12 में 29.5% गरीब थे जिसमें से ग्रामीण जनसंख्या 30.09% एवं शहरी जनसंख्या 26.4% गरीब थे ।
भारत में गरीबी के कारण -
- जनसंख्या दबाव
- देश का धीमी विकास दर
- कृषि का पिछड़ापन
- सीमित संसाधन
- बेरोजगारी


